सामान्य जानकारी, कानूनी सलाह नहीं। प्रक्रिया राज्य और परिस्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। 1 जुलाई 2024 से दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) लागू है। कठिनाई में हों तो वकील या ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क करें।
किसी की गिरफ्तारी या हिरासत होने पर
संविधान और अदालतों द्वारा मान्य अधिकार:
- कारण जानने का अधिकार: अनुच्छेद 22(1) के अनुसार गिरफ्तारी के आधार जल्द से जल्द बताए जाने चाहिए।
- वकील से सलाह: गिरफ्तार व्यक्ति अपनी पसंद के वकील से सलाह ले सकता है और उससे अपना बचाव करा सकता है।
- मजिस्ट्रेट के सामने पेशी: गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर (यात्रा का समय छोड़कर) निकटतम मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना चाहिए (अनुच्छेद 22(2))। निवारक निरोध में विशेष नियम लागू होते हैं।
- मुफ़्त कानूनी सहायता: वकील का खर्च न उठा सकें तो मुफ़्त कानूनी सहायता मिल सकती है (अनुच्छेद 39A और विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987)।
- डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य में दिए गए सुरक्षा उपाय: पुलिसकर्मी स्पष्ट पहचान और नाम-पट्टिका लगाएं, गवाह द्वारा सत्यापित गिरफ्तारी मेमो बने, और किसी रिश्तेदार या मित्र को सूचित किया जाए।
व्यावहारिक कदम:
- शांत रहें और विरोध न करें।
- गिरफ्तारी का कारण पूछें और अधिकारी का नाम व नंबर नोट करें।
- परिवार को सूचित करने और वकील या कानूनी सहायता से बात करने के लिए कहें।
- खाली या बिना पढ़े कागज़ों पर हस्ताक्षर न करें।
- समय, जगह और नाम जल्द से जल्द लिख लें। रिहाई के बाद वकील से उपायों के बारे में सलाह लें।
एफ़आईआर कैसे दर्ज कराएं
एफ़आईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) संज्ञेय अपराध की पहली सूचना होती है और इससे पुलिस जांच शुरू होती है। BNSS में यह धारा 173 में है (पहले CrPC की धारा 154)।
- सूचना दें: थाने जाएं, या जहाँ सुविधा हो वहाँ इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सूचना दें। ज़ीरो एफ़आईआर में अपराध कहीं भी हुआ हो, कोई भी थाना सूचना दर्ज करके बाद में संबंधित थाने को भेज सकता है।
- तथ्य साफ़ बताएं: कौन, क्या, कब, कहाँ और कोई गवाह। सही जानकारी दें, क्योंकि झूठी रिपोर्ट स्वयं अपराध हो सकती है।
- हस्ताक्षर से पहले जांचें: रिपोर्ट पढ़वाकर सुनें और सही होने पर ही हस्ताक्षर करें।
- प्रति लें: आपको एफ़आईआर की मुफ़्त प्रति पाने का अधिकार है।
- पुलिस मना करे तो: ज़िले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को लिखित सूचना भेजें, और मजिस्ट्रेट के पास भी जा सकते हैं। ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफ़आईआर दर्ज करना अनिवार्य है।
उपभोक्ता शिकायत कैसे करें
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 वस्तुएं या सेवाएं खरीदने वाले लोगों की रक्षा करता है।
- सबूत रखें: बिल, वारंटी कार्ड, फ़ोटो, ईमेल और चैट।
- पहले विक्रेता को लिखित शिकायत दें और समाधान के लिए उचित समय दें।
- समाधान न हो तो लिखित नोटिस भेजें, जिसमें समस्या और आपकी मांग बताई गई हो।
- उचित उपभोक्ता आयोग में शिकायत करें (ज़िला, राज्य या राष्ट्रीय, दावे के मूल्य के अनुसार)। कई शिकायतें ई-दाखिल पोर्टल से ऑनलाइन की जा सकती हैं।
- समय-सीमा: आमतौर पर वाद-कारण उत्पन्न होने के दो वर्ष के भीतर शिकायत करनी चाहिए (धारा 69)।
मुफ़्त कानूनी सहायता
विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के अंतर्गत महिलाएं, बच्चे, अनुसूचित जाति और जनजाति के सदस्य, हिरासत में लोग, दिव्यांगजन, मानव तस्करी के पीड़ित और राज्य द्वारा तय आय-सीमा से कम आय वाले लोग मुफ़्त कानूनी सेवा पाने के पात्र हैं। अपने ज़िला न्यायालय में ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क करें, या NALSA की वेबसाइट देखें।